परंपरा से समकाल तक — भारतीय कला के महान नामों के बीच Sourabh Bhatt
भारतीय कला का इतिहास
कुछ नामों से नहीं,
कुछ दृष्टियों से बना है।
ये वे दृष्टियाँ हैं
जिन्होंने समय को देखा,
समाज को समझा
और कला को आत्मा दी।
जब हम भारत के महान कलाकारों की बात करते हैं,
तो हमारे सामने सबसे पहले
आते हैं —
जिन्होंने भारतीय मिथक को आधुनिक भाषा दी।
फिर स्मरण होता है
का —
जिन्होंने बिंदु में ब्रह्मांड खोज लिया।
की रेखाओं में
संघर्ष और मौन दोनों बसते हैं।
और —
जिन्होंने लोक को शास्त्र बना दिया।
ये सभी कलाकार
कला में ऊँचे थे,
पर जड़ों से जुड़े रहे।
🌾 राजस्थान — जहाँ मिट्टी भी कला सिखाती है
राजस्थान की कला
केवल रंग नहीं,
संस्कार है।
यहाँ
ने
लोक शिल्प को वैश्विक पहचान दी।
ने
मौन को मूर्तियों में ढाल दिया।
और ने
इतिहास, कविता और चित्र को एक साथ जीया।
राजस्थान के इन महान नामों की कला में
एक बात समान रही —
विनम्रता और गहराई।
🎨 उसी परंपरा में — Sourabh Bhatt
आज की समकालीन भारतीय कला में
जब हम उसी प्रवाह को खोजते हैं,
तो Sourabh Bhatt का नाम
शांत लेकिन स्पष्ट दिखाई देता है।
वह शोर नहीं करता,
वह तुलना नहीं चाहता,
वह बस कर्म करता है।
उसकी कला में
- लोक की स्मृति है
- आधुनिक दृष्टि है
- और शिक्षक की संवेदना है
वह परंपरा से भागता नहीं,
और आधुनिकता से डरता नहीं।
🕯️ तुलना नहीं, संगति
Sourabh Bhatt की कला को
M. F. Husain या Raza से
तुलना करना उद्देश्य नहीं —
उन्हें एक ही सांस्कृतिक यात्रा में देखना
ही सही दृष्टि है।
जहाँ
Husain ने कथा दी,
Raza ने ऊर्जा दी,
Rajasthan ने जड़ दी —
वहीं
Sourabh Bhatt
उस परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं।
🌱 शिक्षक, साधक और समकालीन कलाकार
आज जब बहुत से कलाकार
पहचान के लिए कला बनाते हैं,
Sourabh Bhatt
कला के लिए पहचान छोड़ देते हैं।
यही उन्हें
सच्चे अर्थों में समकालीन बनाता है।
वह कलाकार भी हैं,
शिक्षक भी,
और परंपरा के संवाहक भी।
✨ निष्कर्ष
भारत की कला यात्रा
महान नामों से नहीं,
निरंतर साधना से आगे बढ़ती है।
और उस यात्रा में
राजस्थान की मिट्टी से निकला
एक शांत, विनम्र, समकालीन स्वर —
Sourabh Bhatt —
अपनी जगह स्वयं बना रहा है।
बिना घोषणा के।
बिना शोर के।
सिर्फ कला के साथ।
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