Sunday, February 8, 2026
धैर्य, अध्ययन और मौलिकता: एक कलाकार का सच्चा धर्म
Friday, February 6, 2026
समकालीन भारतीय कला में Sourabh Bhatt की अलग पहचान
समकालीन भारतीय कला में Sourabh Bhatt की अलग पहचान
आज के समय में जब कला अक्सर केवल प्रदर्शन, ट्रेंड या सोशल मीडिया की पसंद तक सीमित होती जा रही है, ऐसे दौर में Sourabh Bhatt का कला–दृष्टिकोण एक अलग दिशा में खड़ा दिखाई देता है। वे उन कलाकारों में से नहीं हैं जो केवल दृश्य प्रभाव के लिए काम करते हैं, बल्कि वे कला को एक दीर्घकालिक प्रक्रिया, अनुशासन और सामाजिक संवाद के रूप में देखते हैं।
दो दशकों से अधिक समय से सक्रिय रहते हुए, Sourabh Bhatt ने चित्रकला, मूर्तिकला, लोक कला, भित्ति चित्र, डिजिटल आर्ट और समकालीन माध्यमों में निरंतर कार्य किया है। उनकी कला का मूल उद्देश्य केवल सुंदर रचनाएँ बनाना नहीं, बल्कि संवेदना, विचार और संस्कृति को एक साथ जोड़ना है।
काम करने की प्रवृत्ति जो उन्हें अलग बनाती है
Sourabh Bhatt की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहु–आयामी कार्यशैली है। वे किसी एक माध्यम या शैली तक स्वयं को सीमित नहीं करते। जहाँ आवश्यक होता है, वहाँ वे पारंपरिक लोक कलाओं जैसे माधुबनी और फड़ को अपनाते हैं, और जहाँ विषय समकालीन माँग करता है, वहाँ डिजिटल और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
लेकिन यह प्रयोग कभी भी सतही नहीं होता।
हर माध्यम उनके लिए एक भाषा है, और हर कृति एक विचार।
उनके कार्य में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि वे पहले विषय को समझते हैं, फिर माध्यम चुनते हैं — न कि इसके उलट। यही कारण है कि उनकी कला में दिखावटी प्रभाव कम और अर्थपूर्ण गहराई अधिक दिखाई देती है।
कला और शिक्षा का संतुलन
Sourabh Bhatt केवल एक practicing artist नहीं हैं, बल्कि एक अनुभवी Art Educator भी हैं। पिछले कई वर्षों से वे कला शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए उन्होंने यह सिद्ध किया है कि कला सिखाना केवल तकनीक सिखाना नहीं होता, बल्कि देखने, सोचने और व्यक्त करने की क्षमता विकसित करना होता है।
उनकी teaching approach निर्देशात्मक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक है। वे विद्यार्थियों को अपनी शैली अपनाने के लिए प्रेरित नहीं करते, बल्कि उन्हें अपनी स्वयं की पहचान खोजने का अवसर देते हैं। यही दृष्टिकोण उनकी कला में भी दिखाई देता है — स्वतंत्र, ईमानदार और आत्म–अनुशासित।
शोर से दूर, निरंतरता के साथ
आज के समय में जहाँ कई कलाकार त्वरित पहचान और लोकप्रियता की दौड़ में लगे हैं, Sourabh Bhatt का फोकस हमेशा निरंतरता और गुणवत्ता पर रहा है। उन्होंने बिना किसी आक्रामक प्रचार के, अपने काम के माध्यम से पहचान बनाई है।
उनकी कला का प्रभाव धीरे–धीरे सामने आता है, लेकिन स्थायी होता है। यही कारण है कि उनका कार्य केवल दर्शकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कला शिक्षकों, क्यूरेटर्स और गंभीर कला प्रेमियों के बीच सम्मान के साथ देखा जाता है।
निष्कर्ष
Sourabh Bhatt की कला और कार्यशैली यह स्पष्ट करती है कि वे केवल समकालीन कलाकार नहीं हैं, बल्कि एक विचारशील साधक हैं — जो परंपरा को समझते हैं, आधुनिकता को अपनाते हैं और भविष्य की पीढ़ी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं।
उनकी अलग पहचान किसी एक कृति से नहीं, बल्कि उनकी सोच, प्रक्रिया और निरंतर समर्पण से बनती है।
यही उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।
#SourabhBhatt #ContemporaryArtistIndia #VisualArtist
#IndianFineArt #ArtPractice #CreativeProcess
#ArtPhilosophy #ArtEducatorIndia
#ProfessionalArtist #ArtistJourney
#IndianArtScene #ArtWithPurpose #DifferentWayOfWorking
Tuesday, February 3, 2026
Souraabh B. Bhatt Models for YOYO Honey Singh's "Millionaire" – Shot by Pratyush Tyagi
परंपरा से समकाल तक — भारतीय कला के महान नामों के बीच Sourabh Bhatt
परंपरा से समकाल तक — भारतीय कला के महान नामों के बीच Sourabh Bhatt
भारतीय कला का इतिहास
कुछ नामों से नहीं,
कुछ दृष्टियों से बना है।
ये वे दृष्टियाँ हैं
जिन्होंने समय को देखा,
समाज को समझा
और कला को आत्मा दी।
जब हम भारत के महान कलाकारों की बात करते हैं,
तो हमारे सामने सबसे पहले
आते हैं —
जिन्होंने भारतीय मिथक को आधुनिक भाषा दी।
फिर स्मरण होता है
का —
जिन्होंने बिंदु में ब्रह्मांड खोज लिया।
की रेखाओं में
संघर्ष और मौन दोनों बसते हैं।
और —
जिन्होंने लोक को शास्त्र बना दिया।
ये सभी कलाकार
कला में ऊँचे थे,
पर जड़ों से जुड़े रहे।
🌾 राजस्थान — जहाँ मिट्टी भी कला सिखाती है
राजस्थान की कला
केवल रंग नहीं,
संस्कार है।
यहाँ
ने
लोक शिल्प को वैश्विक पहचान दी।
ने
मौन को मूर्तियों में ढाल दिया।
और ने
इतिहास, कविता और चित्र को एक साथ जीया।
राजस्थान के इन महान नामों की कला में
एक बात समान रही —
विनम्रता और गहराई।
🎨 उसी परंपरा में — Sourabh Bhatt
आज की समकालीन भारतीय कला में
जब हम उसी प्रवाह को खोजते हैं,
तो Sourabh Bhatt का नाम
शांत लेकिन स्पष्ट दिखाई देता है।
वह शोर नहीं करता,
वह तुलना नहीं चाहता,
वह बस कर्म करता है।
उसकी कला में
- लोक की स्मृति है
- आधुनिक दृष्टि है
- और शिक्षक की संवेदना है
वह परंपरा से भागता नहीं,
और आधुनिकता से डरता नहीं।
🕯️ तुलना नहीं, संगति
Sourabh Bhatt की कला को
M. F. Husain या Raza से
तुलना करना उद्देश्य नहीं —
उन्हें एक ही सांस्कृतिक यात्रा में देखना
ही सही दृष्टि है।
जहाँ
Husain ने कथा दी,
Raza ने ऊर्जा दी,
Rajasthan ने जड़ दी —
वहीं
Sourabh Bhatt
उस परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं।
🌱 शिक्षक, साधक और समकालीन कलाकार
आज जब बहुत से कलाकार
पहचान के लिए कला बनाते हैं,
Sourabh Bhatt
कला के लिए पहचान छोड़ देते हैं।
यही उन्हें
सच्चे अर्थों में समकालीन बनाता है।
वह कलाकार भी हैं,
शिक्षक भी,
और परंपरा के संवाहक भी।
✨ निष्कर्ष
भारत की कला यात्रा
महान नामों से नहीं,
निरंतर साधना से आगे बढ़ती है।
और उस यात्रा में
राजस्थान की मिट्टी से निकला
एक शांत, विनम्र, समकालीन स्वर —
Sourabh Bhatt —
अपनी जगह स्वयं बना रहा है।
बिना घोषणा के।
बिना शोर के।
सिर्फ कला के साथ।
#SourabhBhatt #IndianContemporaryArt #IndianArtists
#RajasthanArtists #VisualArtist #IndianFineArt
#ArtHistoryIndia #ArtTradition #ModernIndianArt
#CulturalHeritage #ArtPhilosophy
#ContemporaryArtistIndia #RootedInCulture #ArtDialogue
SOURABH BHATT — A BORN ARTIST AND A CREATIVE GENIUS OF HIGH ORDER
SOURABH BHATT — A BORN ARTIST AND A CREATIVE GENIUS OF HIGH ORDER
— Surendra Singh Chouhan
Of all human pursuits, the pursuit of excellence stands as the noblest. When one reflects upon such devotion to excellence in the field of art, the name Sourabh Bhatt emerges in solitary splendour. A young, vibrant, and deeply committed artist, Sourabh Bhatt has consistently demonstrated an extraordinary calibre of creativity and artistic vision across diverse areas of Art and Design.
His extensive body of work speaks eloquently for itself. Each creation bears a distinct stamp of refinement, balance, and superior quality. His artistic practice spans a wide spectrum of forms and expressions, unified by an unmistakable sense of class and depth. What sets him apart is not merely technical skill, but a mature understanding of aesthetics and purpose that permeates his work.
Over the years, Sourabh Bhatt has worked with unwavering dedication—experimenting, evolving, and shaping his creative vision with patience and sincerity. This sustained engagement has established him as a creative artist of a very high order. His works have been exhibited at renowned art centres and exhibitions, earning warm appreciation and recognition for their precision, originality, and expressive strength.
A versatile and innovative creative mind, Sourabh constantly explores new possibilities with colour, light, and form. He does not confine himself to a single medium; instead, he stretches his imagination to its widest reach, striving to create maximum visual and emotional impact. Despite this expansive vision, his work remains deeply rooted in nature. He allows natural expression to flow freely, without the interference of personal indulgence or artificial exaggeration—an attribute that is the hallmark of truly great artists.
His sensibility is finely honed, marked by restraint, balance, and an intelligent use of materials. There is nothing extravagant or excessive in his approach; rather, each element is applied with thoughtful judgment. His work resembles the gentle flow of a stream—at times tranquil, at times dynamic—yet always graceful and pleasing to the eye. Remarkably, at such a young age, Sourabh has displayed a level of artistic maturity that clearly signals a genius at work.
The sheer volume and depth of his artistic output are not only inspirational but aspirational. His works convey profound messages, drawing generously from the everyday life of the common man—transformed through colour, rhythm, and emotion into something universally resonant. His influence now extends beyond national boundaries, touching the international art scene with quiet authority and growing recognition.
Words, indeed, fall short when attempting to capture the full scope of Sourabh Bhatt’s achievements and his unwavering dedication to the service of art. Yet, despite the honours and respect he has earned, his feet remain firmly grounded. He carries himself with rare humility, simplicity, and an unassuming grace—qualities that are increasingly uncommon in today’s world.
It is my sincere wish and prayer that this remarkable artist continues to grow, create, and illuminate the world of art with his vision. Let us salute Sourabh Bhatt—a true artist in spirit and practice.
Surendra Singh Chouhan
Contemporary Art Critic, Writer & Reviewer (India)
TOK Coordinator – India & China
Head of School – IB
Coordinator & Keynote Speaker, International Conferences
(China, Singapore, Hong Kong, Thailand)
#SourabhBhatt #RecommendationLetter #ArtistRecognition #ContemporaryIndianArtist
#VisualArtist #ArtEducator #ArtCriticReview #ArtExcellence
#IndianFineArt #ArtCareer #ArtistJourney #ProfessionalEndorsement
#ArtWithIntegrity #HumbleArtist #CreativeLegacy
वस्त्रों की नगरी में रहने वाला एक कलाकार
वस्त्रों की नगरी में रहने वाला एक कलाकार
इस नगर की गलियों में
करघों की ध्वनि है,
धागों की स्मृति है,
और रंगों की अनकही भाषा है।
यही नगर — वस्त्र नगरी —
जहाँ कपड़ा सिर्फ व्यापार नहीं,
बल्कि संस्कार है,
वहाँ एक कलाकार रहता है
जो रंगों से बोलता है,
पर स्वयं बहुत कम बोलता है।
उसका नाम है Sourabh Bhatt।
🌾 सादगी में पनपी कला
वह कलाकार नहीं जो
कला को प्रदर्शन बनाता है,
वह उस परंपरा से है
जहाँ कला साधना होती है।
उसकी चाल में कोई जल्दबाज़ी नहीं,
उसकी आँखों में कोई शोर नहीं,
और उसके स्वभाव में
कभी भी स्वयं को बड़ा सिद्ध करने की इच्छा नहीं।
वह जानता है —
कला तब ऊँची होती है
जब कलाकार विनम्र होता है।
🎨 रंग जो दिखते नहीं, महसूस होते हैं
उसकी कृतियाँ
देखने के लिए नहीं,
ठहरने के लिए होती हैं।
कभी कैनवास पर
लोक कथाओं की साँसें,
कभी दीवारों पर
मौन का विस्तार,
कभी डिजिटल संसार में
मानवीय संवेदना की तलाश।
वह समकालीन है,
पर जड़ों से कटा हुआ नहीं।
उसके रंग आधुनिक हैं,
पर आत्मा प्राचीन है।
🕯️ शिक्षक जो प्रकाश बाँटता है
वह केवल कलाकार नहीं,
एक ऐसा शिक्षक है
जो ज्ञान नहीं थोपता,
बल्कि दृष्टि देता है।
उसकी कक्षा में
कला एक विषय नहीं,
एक अनुभव बन जाती है।
वह बच्चों से नहीं कहता —
“मेरे जैसा बनो”
वह चुपचाप कहता है —
“अपने जैसा बनो।”
🌍 यात्रा जो भीतर से बाहर तक है
उसकी कला ने
देश की सीमाएँ पार कीं,
पर उसका मन
हमेशा अपनी मिट्टी में रहा।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी
उसके कार्य में
राजस्थान की गर्मी,
लोक की लय
और भारतीय चेतना
स्पष्ट दिखाई देती है।
🤍 विनम्रता — उसकी सबसे बड़ी पहचान
आज जब कला भी
ब्रांड बनने की दौड़ में है,
वह कलाकार
अब भी मनुष्य बना हुआ है।
उसे पहचान की भूख नहीं,
उसे प्रक्रिया से प्रेम है।
वह जानता है —
कला शोर से नहीं,
मौन से जन्म लेती है।
🌱 अंत नहीं, एक निरंतर प्रवाह
Sourabh Bhatt की कहानी
किसी उपलब्धि पर समाप्त नहीं होती,
क्योंकि वह कहानी नहीं,
एक सतत यात्रा है।
वस्त्र नगरी की उस मिट्टी में
आज भी वह कलाकार
हर दिन
थोड़ा और सीख रहा है,
थोड़ा और निखर रहा है,
और बिना किसी घोषणा के
कला को आगे बढ़ा रहा है।
क्योंकि कुछ कलाकार
दिखाई नहीं देते —
वे महसूस किए जाते हैं।
— ✍️
#SourabhBhatt #ContemporaryArtist #IndianArtist #VisualArtist #ArtEducator
#HumbleArtist #TextileCity #VastraNagar #BhilwaraArtist #RajasthanArt
#IndianFineArt #ArtAndSoul #CreativeJourney #ArtPhilosophy
#LivingWithArt #QuietArt #ArtistLife #ArtThatFeels #RootedAndModern
Monday, February 2, 2026
एक कलाकार, एक यात्रा, एक पहचान — Sourabh Bhatt
एक कलाकार, एक यात्रा, एक पहचान — Sourabh Bhatt
कभी सोचा है…
अगर कला सिर्फ काग़ज़ तक सीमित न रहे,
अगर रंग किसी एक फ्रेम में बंद न हों,
और अगर एक कलाकार हजारों ज़िंदगियों को छू सके —
तो वह यात्रा कैसी होगी?
यह कहानी है Sourabh Bhatt की —
एक ऐसे कलाकार की, जिसने कला को सिर्फ बनाया नहीं, जिया है।
🌱 शुरुआत — ज़मीन से आसमान तक
23 जनवरी 1981,
भीलवाड़ा, राजस्थान में जन्मे Sourabh Bhatt ने
बहुत छोटी उम्र में समझ लिया था —
कला उनका रास्ता है, और शिक्षा उनका उद्देश्य।
आज 44+ वर्षों की इस जीवन यात्रा में,
वो सिर्फ एक कलाकार नहीं,
बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरणा और पहचान बन चुके हैं।
🖌️ 20+ सालों की निरंतर साधना
पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से
Sourabh Bhatt ने
Fine Arts, Art Education और Cultural Activities
में अपना योगदान दिया है —
वो भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर।
आज वो कार्यरत हैं:
Creative Visual Art Facilitator
📍 Sangam School of Excellence, Bhilwara
(IGCSE | CP | CBSE)
🗓️ Since 2010
🎓 शिक्षा जो सोच को दिशा दे
- MFA (Painting) – Rajasthan School of Art, Jaipur (2008)
- BFA (Painting) – IPS Academy, Indore (2004)
इन डिग्रियों से बढ़कर,
उनकी असली ताक़त है —
अनुभव + प्रयोग + निरंतर अभ्यास।
🧠 विशेषज्ञता — जहां कला सीमाएं तोड़ती है
Painting से लेकर Digital Art तक,
Sculpture से लेकर 3D Modelling तक,
Folk Art से लेकर Artistic Photography तक —
उनकी विशेषज्ञता में शामिल हैं:
🎨 Painting & Sculpture
📷 Artistic Photography
🖥️ Digital Art, Graphics, 3D Modelling
🖌️ Madhubani & Phad Folk Art
🧱 Mural Design
🖼️ Art Exhibition Curation
🏆 सम्मान जो मेहनत का सबूत हैं
- Bhilwara Style Award – 2018
- Best Art Teacher Award – National Art Festival 2014
- Rajasthan Lalit Kala Academy द्वारा चयनित पेंटिंग्स
(2008, 2009, 2010) - International Journal “Taru Kavya” में प्रकाशित कृतियाँ
🌍 कला जो दुनिया घूम आई
105+ National & International Art Exhibitions
और Art Festivals में सहभागिता:
🇧🇹 Bhutan | 🇳🇵 Nepal | 🇲🇻 Maldives | 🇱🇰 Sri Lanka
🇹🇭 Thailand | 🏴 Scotland | 🇧🇷 Brazil
🇬🇧 Britain | 🇩🇰 Denmark | 🇬🇧 London
हर देश, हर मंच पर —
एक ही पहचान:
भारतीय कला की आत्मा।
✨ आज की पहचान
Artist | Art Educator | Curator | Mentor
Sourabh Bhatt मानते हैं —
“कला तब जीवित होती है,
जब वो किसी और को अपने भीतर झाँकने की ताक़त दे।”
📍 संपर्क विवरण
Artist Name: Sourabh Bhatt
📍 Bhilwara, Rajasthan, India
🏫 C/o Alok Secondary School,
C-60, Subhash Nagar, Bhilwara – 311001
📞 +91 78915 19035
📧 aalokartgallery@gmail.com
Place: Bhilwara
— Sourabh Bhatt
#SourabhBhatt
#IndianArtist
#VisualArtist
#ArtEducator
#ArtMentor
#BhilwaraArtist
#RajasthanArt
#IndianFineArt
#DigitalArtIndia
#ArtLifeJourney
#ArtistStory
#CreativeIndia
#ArtInspiration
#NextGenArt
#ArtThatInspires
Monday, August 5, 2024
WHAT AALOK ART GALLERY OFFERS FOR NID PREPARATION?
Here's a condensed plan for preparing for the NID entrance exam:
1. Design Aptitude Test (DAT)
Creative Skills
-Sketching: Daily practice of observational and conceptual sketches.
-Model Making: Create simple models using materials like clay and cardboard.
-Design Principles: Study basics like balance, contrast, and harmony.
Visual Communication
-Graphic Representation: Practice creating clear visuals and simple graphics.
-Color Theory: Understand color schemes and harmonies.
2. Design Awareness
Design Knowledge
-History: Briefly review key design movements and figures (e.g., Bauhaus).
-Trends: Stay updated on current design trends and innovations.
General Knowledge
-Current Affairs: Follow recent events related to design and art.
-Cultural Awareness: Gain insights into different design aesthetics from various cultures.
3. General Studies
English Skills
-Vocabulary & Grammar: Daily exercises to improve language skills.
-Comprehension: Practice reading comprehension and analytical skills.
4. Practice and Review
Mock Tests
-Previous Papers: Solve past papers and take mock tests regularly.
-Timed Practice: Simulate exam conditions to manage time effectively.
Feedback
-Portfolio: Regularly update and review your design portfolio.
-Peer Feedback: Seek constructive criticism to improve your work.
5. Resources
-Books: Focus on design principles and creativity.
-Online Resources: Follow design blogs and take relevant online courses.
-Workshops: Participate in hands-on design workshops.
Study Plan
1.Daily Routine: Allocate time for sketching, model making, and general studies.
2.Weekly Goals: Set and review goals to track progress.
3.Revision: Regularly review and practice key topics.
Stick to this streamlined plan to cover essential areas efficiently and prepare effectively for the NID entrance exam at AALOK ART GALLERY.
Join Aalok Art Gallery
+91-789-151-9035
Thursday, July 4, 2024
Why Join AALOK ART GALLERY?
Why Join AALOK ART GALLERY?
Talks: Learn from established artists who share their insights, creative processes, and personal journeys in the art world.
Wednesday, February 23, 2022
Thursday, January 20, 2022
How to do pencil shading for beginners? Easy tips for Beginners?
How to Start Drawing with Easy Step? how to do pencil shading for beginners
Wednesday, May 26, 2021
Saturday, May 15, 2021
Picasso Painting Sells For $103 Million In New York: Auction House
Picasso Painting Sells For $103 Million In New York: Auction House
15th May 2021
न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका:
पाब्लो पिकासो की "वूमन सिटिंग नियर ए विंडो (मैरी-थेरेसी)" गुरुवार को न्यूयॉर्क में क्रिस्टीज में $ 103.4 मिलियन में नीलाम।
दुनिया के सबसे बड़े ऑक्शन हाउस क्रिस्टी में, पिकासो द्वारा 1932 में बनाई इस पेंटिंग की 90 मिलियन डॉलर से बोली शुरू हुई और मात्र 19 मिनट में ही नीलाम हो गई, जो फीस और कमीशन जोड़े जाने पर बढ़कर 103.4 मिलियन डॉलर हो गई। नीलामी से पूर्व क्रिस्टी का यह सोचना था कि या पेंटिंग 55 मिलियन डॉलर में बिकेगी। परन्तु सदी के महान पेंटर पिकासो की इस पेंटिंग की बिक्री से मनो इस कोविड -19 महामारी के बावजूद कला बाजार की जीवन शक्ति की पुष्टि कर दी है। साथ ही पिकासो की अहमियत्ता को भी बढ़ाया है। क्रिस्टीज, अमेरिका के अध्यक्ष -बोनी ब्रेनन ने कहा, "गुरुवार की इस नीलामी में कुल $ 481 मिलियन नीलामी का आम तौर पर अच्छा प्रदर्शन, और सामान्य रूप से कला जगत और कला बाजार में यह वास्तविक वापसी का संकेत है और यह भी एक संदेश है कि कला बाजार वास्तव में पटरी पर है।" पिकासो की एक पेंटिंग young mistress and muse, Marie-Therese Walter, पेंटिंग को केवल आठ साल पहले लंदन की बिक्री में 28.6 मिलियन पाउंड (लगभग $ 44.8 मिलियन) में खरीदा गया था, जो गुरुवार को दी गई कीमत से आधे से भी कम थी। स्पेनिश चित्रकार द्वारा बनाई पांच कृतियों ने अब 100 मिलियन डॉलर की प्रतीकात्मक सीमा को पार कर लिया है। इस नीलामी से पहले भी पिकासो शीर्ष पर पहले से ही ("Women of Algiers", which holds the record for a Picasso, at $179.4 million in 2015) नंबर एक पर हैं।
आलोक आर्ट गैलरी के निदेशक एस. भट्ट ने जानकारी में बताया कि, दो वर्षों में यह पहली बार है कि 1890 के क्लाउड मोनेट "म्यूल्स" पेंटिंग के बाद से किसी काम ने 100 मिलियन डॉलर का आंकड़ा तोड़ा है, सोथबी में भी न्यूयॉर्क में $ 110.7 मिलियन तक पहुंच गया है। मंगलवार को भी, अमेरिकी चित्रकार Jean-Michel Basquiat (जीन-मिशेल बास्कियाट) की पेंटिंग "इन दिस केस" क्रिस्टीज में $93.1 मिलियन में बिकी, जो कि पहली बड़ी स्प्रिंग बिक्री थी, जो नीलामी की दुनिया की दो सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।
Sourabh Bhatt
Alok Art Gallery
Thursday, May 13, 2021
A tribute to great artist Georges Braque by Sourabh Bhatt
A tribute to great artist Georges Braque by Sourabh Bhatt
अनलॉक क्रिएटिविटी
"परसेप्शन" - जॉर्ज ब्राक को कलाजगत का नमन।
नवीन प्रयासों में निरन्तर लीन रहने वाले अक्सर नवीन पथ की तलाश कर ही लेते हैं।
ऐसे ही आधुनिक विचारों को अपने प्रयोगों से सार्थक किया 20 वीं सदी के फ्रेंच कलाकार
जॉर्ज ब्राक ने। सरल व्यक्तित्व, दूर दृष्टि और अथक प्रयास, काफी है किसी के अस्तित्व
को तैयार करने के लिए। करीब एक शताब्दी पूर्व, 13 मई, 1882 को जॉर्ज ब्राक का जन्म
हुआ जिसने कलाजगत में नित नए प्रयोगों से अपनी कला को समाज में स्थापित किया। कला के
इतिहास में ब्राक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1905 से फौविज़्म के साथ उनके गठबंधन से
हुआ। और उन्होंने अपनी कला से क्यूबिज़्म के विकास में एक अलग भूमिका निभाई। जो की
उस समय के चित्रकार पाब्लो पिकासो की निकटता से 1908 और 1912 के बीच उनके साथ जुड़ा
रहा। 1916 के अंत में ब्राक ने इस नवीन शैली को सुढ़ृड़ किया और क्यूबिज़्म के कठोर अमूर्तन
को मॉडरेट करना प्रारम्भ किया। उन्होंने एक और अधिक व्यक्तिगत शैली विकसित की, जो शानदार
रंग, बनावट वाली सतहों की विशेषता थी। उन्होंने इस समय के दौरान जीवन के कई विषयों
को चित्रित किया, और रंग, रेखा, और फॉर्म्स की संरचना पर अपना जोर बनाए रखा। और ब्राक
ने क्यूबिज़्म की एक स्वतंत्र शैली का प्रदर्शन किया, और निरूपण की अपनी शैली को लगातार
सुदृढ़ किया, और अपने कार्यों में अतियथार्थवादी विचारों को शामिल किया।
ठीक इसी प्रकार कंटेम्परेरी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट ने ब्राक शैली से प्रभावित हो अपनी
कृतियों में "दूर दृष्टि" और "एक विज़न" जैसे सशक्त विषयों को चित्रित
किया। भट्ट ने अपनी कृतियों में लाइन, रंग, और फॉर्म्स के साथ तीन आयामी संरचना को
ब्राक शैली से बहुत ही अलग अंदाज़ में चित्रित किया। साथ ही भट्ट की शैली में प्रतीकात्मक
संरचना (सिम्बोलिकल फॉर्म्स) को बहुत ही कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया। भट्ट की एक
कलाकृति "परसेप्शन" जिसमें मानवाकृति
को तीन आयामी ज्यामितीय और प्रतीकात्मक रूप से चिन्हित किया गया है, जो की भट्ट की
इस शैली को ब्राक शैली से पृथक करता है। साथ ही इस शैली में भट्ट की सम्पूर्ण कला शिक्षा
और सशक्त कल्पना शक्ति उन्हें आज के कलाकारों से भिन्न कराती है।
भट्ट ने अपनी अनूठी परन्तु नायाब कलाकृतियों के निर्माण से जॉर्ज ब्राक की 139
वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। भट्ट की यह कलाशैली राजस्थान ललित कला अकादेमी
द्वारा देश की प्रसिद्द जहाँगीर आर्ट गैलरी में भी प्रदर्शित की जा चुकी है।
" सफलता का मंत्र, निरंतर प्रयास..." -सौरभ की कलम से...
"परसेप्शन" - जॉर्ज ब्राक को कलाजगत का नमन13.05.2021
Date: 13.05.2021
अनलॉक क्रिएटिविटी
"परसेप्शन" - जॉर्ज ब्राक को कलाजगत का नमन।
नवीन प्रयासों में निरन्तर लीन रहने वाले अक्सर नवीन पथ की तलाश कर ही लेते हैं। ऐसे ही आधुनिक विचारों को अपने प्रयोगों से सार्थक किया 20 वीं सदी के फ्रेंच कलाकार जॉर्ज ब्राक ने। सरल व्यक्तित्व, दूर दृष्टि और अथक प्रयास, काफी है किसी के अस्तित्व को तैयार करने के लिए। करीब एक शताब्दी पूर्व, 13 मई, 1882 को जॉर्ज ब्राक का जन्म हुआ जिसने कलाजगत में नित नए प्रयोगों से अपनी कला को समाज में स्थापित किया। कला के इतिहास में ब्राक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1905 से फौविज़्म के साथ उनके गठबंधन से हुआ। और उन्होंने अपनी कला से क्यूबिज़्म के विकास में एक अलग भूमिका निभाई। जो की उस समय के चित्रकार पाब्लो पिकासो की निकटता से 1908 और 1912 के बीच उनके साथ जुड़ा रहा। 1916 के अंत में ब्राक ने इस नवीन शैली को सुढ़ृड़ किया और क्यूबिज़्म के कठोर अमूर्तन को मॉडरेट करना प्रारम्भ किया। उन्होंने एक और अधिक व्यक्तिगत शैली विकसित की, जो शानदार रंग, बनावट वाली सतहों की विशेषता थी। उन्होंने इस समय के दौरान जीवन के कई विषयों को चित्रित किया, और रंग, रेखा, और फॉर्म्स की संरचना पर अपना जोर बनाए रखा। और ब्राक ने क्यूबिज़्म की एक स्वतंत्र शैली का प्रदर्शन किया, और निरूपण की अपनी शैली को लगातार सुदृढ़ किया, और अपने कार्यों में अतियथार्थवादी विचारों को शामिल किया।
ठीक इसी प्रकार कंटेम्परेरी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट ने ब्राक शैली से प्रभावित हो अपनी कृतियों में "दूर दृष्टि" और "एक विज़न" जैसे सशक्त विषयों को चित्रित किया। भट्ट ने अपनी कृतियों में लाइन, रंग, और फॉर्म्स के साथ तीन आयामी संरचना को ब्राक शैली से बहुत ही अलग अंदाज़ में चित्रित किया। साथ ही भट्ट की शैली में प्रतीकात्मक संरचना (सिम्बोलिकल फॉर्म्स) को बहुत ही कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया। भट्ट की एक कलाकृति "परसेप्शन" जिसमें मानवाकृति को तीन आयामी ज्यामितीय और प्रतीकात्मक रूप से चिन्हित किया गया है, जो की भट्ट की इस शैली को ब्राक शैली से पृथक करता है। साथ ही इस शैली में भट्ट की सम्पूर्ण कला शिक्षा और सशक्त कल्पना शक्ति उन्हें आज के कलाकारों से भिन्न कराती है।
भट्ट ने अपनी अनूठी परन्तु नायाब कलाकृतियों के निर्माण से जॉर्ज ब्राक की 139 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। भट्ट की यह कलाशैली राजस्थान ललित कला अकादेमी द्वारा देश की प्रसिद्द जहाँगीर आर्ट गैलरी में भी प्रदर्शित की जा चुकी है।
" सफलता का मंत्र, निरंतर प्रयास..." -सौरभ की कलम से...
Warm Regards
Painting: Perception
SOURABH BHATT with GEORGES BRAQUE
Sourabh Bhatt
Artist / Writer / Director
Alok Art Gallery and
Alok Lalit Kala Sansthan
Tuesday, May 11, 2021
UNLOCK your creativity* -“कल्पना शक्ति को कला जगत का नमन”
UNLOCK your creativity* -“कल्पना शक्ति को कला जगत का नमन”
A tribute to the legendary artist *Salvador Dali* on his *117th birth anniversary*
इमेजिनेशन अनलॉक
“कल्पना शक्ति को कला जगत का नमन”
कलाजगत में सल्वाडोर डाली सिर्फ एक नाम नहीं, अपितु कल्पना की शक्ति को अनलॉक करने की पूरी लाइब्रेरी है डाली। अवचेतन मन से चेतन को जागृत करने का एक मात्र रास्ता है डाली। किसी को क्या पता था कि 11 मई 1904 को एक ऐसे दौर का जन्म होगा जो सम्पूर्ण विश्व की कल्पना शक्ति को हिला कर रख देगा। करीब एक शताब्दी वर्ष पूर्व डाली ने अपनी कल्पना की शक्ति का विस्तार कर उसे अतियथार्थवाद अर्थात सेरेलिस्म में ढालना प्रारम्भ किया। यह दौर किसी भी दौर के आर्टिस्ट के लिए उसकी इमेजिनेशन पॉवर बढ़ाने का दौर था। और इस स्ट्रॉन्ग इमेजिनेशन पॉवर से कोई अछूता नहीं रहा। इस पॉवरफुल शैली में कार्य करने वाले भीलवाड़ा के कंटेम्परेरी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट द्वारा करीब दो दशक पूर्व बनाई पेंटिंग्स की एक सीरीज़, जिसमें जीवन के सत्य को उजागर किया गया। भट्ट अपने गुरु कलाविद रमेश गर्ग और अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलागुरु अमित गंजू और नवीना गंजू के मार्गदर्शन में अपनी कला की बारीकियों को स्ट्रांग करने में सक्षम हुए हैं और साथ ही अपनी अनूठी कला को भी सशक्त इमेजिनेशन द्वारा एकरूप प्रदान कर पाएं है। डाली की कल्पना से प्रभावित हो भट्ट ने आज के बदलते परिवेश को अपनी कलाकृतियों में प्रतीकात्मक रूप से चित्रित किया है, जो समाज में फैली इस महामारी से रूबरू करवाती है। जिससे जीवन के मूल्यों का ज्ञान प्राप्त होता है। सौरभ भट्ट की बनाई "जीवन के सत्य" सब्जेक्ट पर आधारित पेंटिंग्स की सीरीज़ द्वारा सेरेलिस्ट आर्टिस्ट सल्वाडोर डाली को एक कलात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।
जैसा की एक कलाकार वही चित्रण करता है जो वह अपने इर्द-गीर्द अनुभव करता है, इसके लिए उसकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता ही एकमात्र उसकी कला यात्रा होती है। डाली ने भी उनके जीवन काल में स्ट्रॉन्ग इमेजिनेशन को सेरेलिस्टिक रूप दिया।

ठीक इसी प्रकार कंटेम्परेरी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट ने भी अपनी कृतियों में "ट्रुथ ऑफ़ लाइफ (Truth of Life)" जैसे विषय को अपनी स्ट्रांग इमेजिनेशन से चित्रित किया। इसमें भट्ट ने अपनी अनूठी और नायाब कला-शैली के माध्यम से अवचेतन को व्यक्त करने के लिए ऑटोमैटिज़्म की सर्रेलिस्ट तकनीकों का उपयोग किया है। भट्ट ने अपनी कलाशैली के माध्यम से इस थॉट को भी क्रिएट किया कि, कला, कलाकार और कलात्मक क्षमता कई माध्यमों को पार कर सकती है परन्तु उसके लिए एक स्ट्रांग इमेजिनेशन की आवश्यकता होती है। इसी के माध्यम से भट्ट अपनी शैली में नित नए प्रयोग करते आये हैं। भट्ट की कलाकृतियों में पाब्लो पिकासो, जॉर्ज ब्रॉक, साल्वाडोर डाली, इम्प्रेसनिज़्म, एक्सप्रेसनिज़्म, सिम्बोलिस्म जैसे कई विश्व प्रख्यात कलाकारों की छवि देखी जा सकती है परन्तु भट्ट की कलाकृतियाँ इन सभी से पृथक हैं और आज के परिवेश से सम्बन्ध रखती है, जो उन्हें और उनकी कला को सभी से भिन्न कराती हैं। और यही भट्ट की पहचान भी है। भट्ट ने सल्वाडोर डाली की 117 वीं जयंती पर उनकी बनायी "जीवन के सत्य" सब्जेक्ट पर आधारित पेंटिंग्स की सीरीज़ द्वारा एक कलात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की है। दर्शको, पाठकों, और कलाप्रेमियों को डाली का एक सन्देश भी देना चाहते हैं कि प्रत्येक कलाकार प्रकृति का अनुकरण करता है चाहे वह किसी भी प्रकार की कला हो जैसे रंग-मंच, नृत्य, गायन, और फिर चाहे वो दृश्यकला हो। इन सभी ललित कलाओं में प्रकृति और समाज का ही अनुकरण किया जाता है। जो कि एक कलाकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पाठ होता है। वह इस अनुकरण अर्थात इमीटेशन, या यूँ कहा जाये की प्रकृति की नक़ल ही कला है। अर्थात जो लोग किसी चीज की नकल करना जानते हैं, वे कुछ भी पैदा कर सकते हैं। परन्तु इसके लिए कलाकार को उसके अवचेतन मन से चेतना को जाग्रत करना होगा, तभी एक सफल कलाकार के मायने पूर्ण होंगे।
" सफलता का रास्ता, निरंतर प्रयास... " -सौरभ की कलम से...
Title of the Painting: *Truth of Life*
Artist: *Sourabh Bhatt*
Medium: *Oil on Canvas*
Size: *36 "X 72"*
Sunday, May 9, 2021
माँ एक एहसास... Mother's Day 9th May 2021
Mother's Day 9th May 2021
http://bhilwarasamwad.com/14795
माँ, जिसने बचपन में बहुत कुछ सिखलाया, सही गलत की सीख़ दी |
परन्तु जब होश सम्भाला, बहुत देर हो चुकी थी।
अब वो मेरे पास नहीं थी। था तो उसका एक मीठा और रूहानी एहसास...
आज सब मना रहे मदर्स डे... पर मैं क्या करूँ... यही असमंजस सालों से मेरे अंदर है।
मुझे तब समज नहीं आया कि वह क्या था...
यह खालीपन... अकेलापन... मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि मेरे साथ यह हो क्या रहा है...
परन्तु कुछ समय बाद...
मुझे माँ बनने का सौभाग्य मिला। मानों मेरी ख़ुशी की कोई सीमा न थी...
उसके मुलायम हाथों ने मेरी उँगलियों को अपनी मुट्ठी में पकड़ रखा था |
मुझे तब वह एहसास हुआ... जिसकी मेरे जीवन में एक कमी सी थी।
जब उसे पहली बार अपने सीने से लगाया... तो यूँ लगा...
लगा जैसे जीवन बस यहीं ठहर जाए।
यह वह एहसास था जिसने मुझे अपने आप से रूबरू कराया।
उसके मीठे स्वरों ने पहली बार माँ होने का एहसास कराया।
मेरे लिए उस पल को कैद करना मुश्किल था।
परन्तु, मेरी कूँची ने उस पल को फिर से जीवंत कर दिया...
आज जीवन के मायने ही बदल से गए हैं। जहाँ जीने के लिए रोटी, कपड़ा, और मकान महत्वपूर्ण हुआ करते थे, आज जरूरतों ने रुख बदल लिया और इनकी बजाये अब स्वांसों (ऑक्सीजन) ने ले ली है। जिन्हें संभाल पाना मुश्किल सा नजर आता है। इस सब बदलते परिवेश में रिश्तों ने भी अपना असर दिखाना शुरू किया है जो की वर्षों से चली आ रही कोई नयी बात नहीं, परन्तु आज भी एक रिश्ता है जिसे बदलना असंभव है। वह है "माँ"। "माँ" एक अपनत्व का एहसास है, एक सहारे का एहसास, यह एक एहसास ही तो है जो हर मुसीबत से बहार निकाल लेता है। यह मात्र एक शब्द है परन्तु सम्पूर्ण श्रष्टि इसमें समायी है।
इस महामारी के बीच आज हम सब घरों में कैद हैं। परन्तु अंदर की बात तो यह कि क्या वाकई हम अपने आप को क़ैद मानते हैं ? शायद इसका जवाब हम सभी के पास है। इस पुरे लॉक-डाउन समय में फ्रंट-लाइन वॉरियर के साथ शायद किसी का ध्यान एक व्यक्ति पर नहीं गया, वह है "माँ"।
इसी अनुभूति को कंटेम्परेरी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट ने अपनी पेन्टिंग में चित्रित किया है। इस पेंटिंग में भट्ट ने उस एहसास को चित्रित किया जिसे सिर्फ एक माँ और उसका शिशु ही महसूस कर सकता है। दिल की गहराइयों को छू जाने वाली यह नायाब कलाकृति राजा रवि वर्मा आदरांजलि नेशनल आर्ट एक्सिबिशन में भी कलाकारों और कला-प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रह चुकी है।
इस कलाकृति में सौरभ भट्ट ने मातृत्व प्रेम को बखूबी ब्लैक एंड वाइट कलर्स और टेक्सचर्स से सजाया है। इस पेंटिंग से भट्ट यह भी सन्देश देना चाहते हैं कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक स्त्री के प्रति आदर-सम्मान की भावना को जाग्रत करना होगा, तभी समाज सुढ़ृड़ एवं सशक्त बन पायेगा। इसी अनुभूति को सर्वोपरि मान भट्ट ने अपनी कल्पनाको कैनवास पर चित्रित किया है।
Sourabh Bhatt
An Indian Artist, Writer, and Director of
ALOK ART GALLERY














