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Tuesday, February 3, 2026

वस्त्रों की नगरी में रहने वाला एक कलाकार

वस्त्रों की नगरी में रहने वाला एक कलाकार

इस नगर की गलियों में
करघों की ध्वनि है,
धागों की स्मृति है,
और रंगों की अनकही भाषा है।

यही नगर — वस्त्र नगरी
जहाँ कपड़ा सिर्फ व्यापार नहीं,
बल्कि संस्कार है,
वहाँ एक कलाकार रहता है
जो रंगों से बोलता है,
पर स्वयं बहुत कम बोलता है।

उसका नाम है Sourabh Bhatt


🌾 सादगी में पनपी कला

वह कलाकार नहीं जो
कला को प्रदर्शन बनाता है,
वह उस परंपरा से है
जहाँ कला साधना होती है।

उसकी चाल में कोई जल्दबाज़ी नहीं,
उसकी आँखों में कोई शोर नहीं,
और उसके स्वभाव में
कभी भी स्वयं को बड़ा सिद्ध करने की इच्छा नहीं।

वह जानता है —
कला तब ऊँची होती है
जब कलाकार विनम्र होता है।


🎨 रंग जो दिखते नहीं, महसूस होते हैं

उसकी कृतियाँ
देखने के लिए नहीं,
ठहरने के लिए होती हैं।

कभी कैनवास पर
लोक कथाओं की साँसें,
कभी दीवारों पर
मौन का विस्तार,
कभी डिजिटल संसार में
मानवीय संवेदना की तलाश।

वह समकालीन है,
पर जड़ों से कटा हुआ नहीं।

उसके रंग आधुनिक हैं,
पर आत्मा प्राचीन है।


🕯️ शिक्षक जो प्रकाश बाँटता है

वह केवल कलाकार नहीं,
एक ऐसा शिक्षक है
जो ज्ञान नहीं थोपता,
बल्कि दृष्टि देता है।

उसकी कक्षा में
कला एक विषय नहीं,
एक अनुभव बन जाती है।

वह बच्चों से नहीं कहता —
“मेरे जैसा बनो”
वह चुपचाप कहता है —
“अपने जैसा बनो।”


🌍 यात्रा जो भीतर से बाहर तक है

उसकी कला ने
देश की सीमाएँ पार कीं,
पर उसका मन
हमेशा अपनी मिट्टी में रहा।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी
उसके कार्य में
राजस्थान की गर्मी,
लोक की लय
और भारतीय चेतना
स्पष्ट दिखाई देती है।


🤍 विनम्रता — उसकी सबसे बड़ी पहचान

आज जब कला भी
ब्रांड बनने की दौड़ में है,
वह कलाकार
अब भी मनुष्य बना हुआ है।

उसे पहचान की भूख नहीं,
उसे प्रक्रिया से प्रेम है।

वह जानता है —
कला शोर से नहीं,
मौन से जन्म लेती है।


🌱 अंत नहीं, एक निरंतर प्रवाह

Sourabh Bhatt की कहानी
किसी उपलब्धि पर समाप्त नहीं होती,
क्योंकि वह कहानी नहीं,
एक सतत यात्रा है।

वस्त्र नगरी की उस मिट्टी में
आज भी वह कलाकार
हर दिन
थोड़ा और सीख रहा है,
थोड़ा और निखर रहा है,
और बिना किसी घोषणा के
कला को आगे बढ़ा रहा है।


क्योंकि कुछ कलाकार
दिखाई नहीं देते —
वे महसूस किए जाते हैं।

— ✍️


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